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बिहार में राज्यसभा चुनाव के बाद सियासी हलचल तेज, चिराग पासवान का बड़ा दावा, RJD में टूट की आशंका

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पटना: बिहार में राज्यसभा चुनावों के परिणामों ने महागठबंधन को जहां राजनीतिक झटका दिया, वहीं विपक्ष की अंदरूनी कमज़ोरियों को उजागर कर दिया। हार का असर अभी कुछ हद तक तेजस्वी यादव संभाल ही रहे थे कि इस बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान के बयान ने नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी। चिराग ने दावा किया कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में बड़ी टूट हो सकती है और कई विधायक उनके संपर्क में हैं। इस बयान के बाद विपक्षी दलों में बेचैनी बढ़ गई है और राजनीतिक चर्चा गर्म हो गई है।
चिराग पासवान का बयान:
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि सिर्फ RJD ही नहीं, बल्कि कांग्रेस में भी असंतोष फैल रहा है। उनके मुताबिक, विपक्षी दल अपनी हार की समीक्षा करने की बजाय आरोप लगाने और अंदरूनी कलह में उलझे हैं। चिराग ने तंज भरे अंदाज में कहा कि जिन दलों के नेता दूसरों पर आरोप लगा रहे हैं, उनकी अपनी पार्टी भी टूट की कगार पर खड़ी है।
उन्होंने साफ किया कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कई RJD विधायक उनके संपर्क में थे और इस बात का संकेत चुनाव में अनुपस्थित रहने वाले विपक्षी विधायकों से भी मिला। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए चिराग ने कहा कि आधे विधायक मतदान के लिए नहीं पहुंचे, जो पार्टी के भीतर असंतोष का स्पष्ट संकेत है। उनका कहना था कि हार के बाद बार-बार “हॉर्स ट्रेडिंग” जैसे आरोप लगाना आत्ममंथन से बचने का तरीका है।
राज्यसभा चुनाव की पृष्ठभूमि:
हाल ही में हुए बिहार राज्यसभा चुनाव में NDA ने पांचों सीटों पर जीत दर्ज की। पांचवीं सीट पर थोड़ी देर तक सस्पेंस बना रहा, लेकिन एनडीए ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए सभी सीटें जीत लीं। इस जीत ने सत्ता पक्ष को मजबूती दी है, जबकि विपक्ष के लिए यह हार बड़ी चुनौती बन गई है।
तेजस्वी यादव का पलटवार:
महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने हार के लिए पार्टी के अंदरूनी कारणों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि यदि कुछ लोगों ने सहयोग किया होता तो नतीजा अलग होता। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी पर धनबल और अन्य तरीकों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। राज्यसभा चुनाव के तुरंत बाद यह बयान सामने आने से स्पष्ट है कि बिहार में सियासी खींचतान अब और तेज होने वाली है।
राजनीतिक समीकरण और आगामी परिदृश्य:
राज्यसभा चुनाव के बाद सत्ता पक्ष अपने दावों से दबाव बनाए हुए है, जबकि विपक्ष के लिए अब एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि चिराग पासवान के दावे कितने सच साबित होते हैं। अगर विपक्षी दलों में असल में टूट होती है तो इसका असर सीधे बिहार की राजनीति पर पड़ेगा। फिलहाल इतना तय है कि राज्यसभा चुनावों के बाद भी राजनीतिक गर्मी कम होने के बजाय और बढ़ गई है।

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